अभी रौशन हुआ जाता है रस्ता वो देखो एक औरत आ रही है
Writer
Shakeel Jamali
@shakeel-jamali
4
1
Sher
3
Ghazal
0
Nazm
115 views
sherKuch Alfaaz
sherKuch Alfaaz
मसअला ख़त्म हुआ चाहता है दिल बस अब ज़ख़्म नया चाहता है
sherKuch Alfaaz
वो अपने ख़ून से लिखने लगी है नाम मेरा अब इस मज़ाक़ को संजीदगी से लेना है
sherKuch Alfaaz
सियासत के चेहरे पे रौनक़ नहीं ये औरत हमेशा की बीमार है
sherKuch Alfaaz
हो गई है मिरी उजड़ी हुई दुनिया आबाद मैं उसे ढूँढ़ रहा हूँ ये बताने के लिए
sherKuch Alfaaz
शदीद गर्मी में कैसे निकले वो फूल-चेहरा सो अपने रस्ते में धूप दीवार हो रही है
sherKuch Alfaaz
कुछ लोग हैं जो झेल रहे हैं मुसीबतें कुछ लोग हैं जो वक़्त से पहले बदल गए
sherKuch Alfaaz
ग़म के पीछे मारे मारे फिरना क्या ये दौलत तो घर बैठे आ जाती है
sherKuch Alfaaz
मैं ने हाथों से बुझाई है दहकती हुई आग अपने बच्चे के खिलौने को बचाने के लिए
sherKuch Alfaaz
ख़ुदा का शुक्र अदा कर वो बे-वफ़ा निकला ख़ुशी मना कि तिरी जान की बहाली हुई
Similar Writers
Our suggestions based on Shakeel Jamali.







