इक अव्वल दर्जे का पाक इक माहिर है मन तो तुझ में रमता है दिल काफ़िर फिर है
Writer
Vikram Gaur Vairagi
@vikram-vairagi
15
Sher
1
Ghazal
1
Nazm
कूज़ा-गर मिल गया तो पूछूँगा मेरी मिट्टी कहाँ से लाया था
टूटी चीज़ों को बदल दें था बेहतर वरना तू जो चाहता तो दोबारा बना लेता हमें
टूटी चीज़ों को बदल देना था बेहतर वरना तू अगर चाहता दोबारा बना लेता हमें
यूँँ बे-तरतीब ज़ख़्मों ने बताया राज़ क़ातिल का सलीक़े से जो मेरा क़त्ल गर होता तो क्या होता
बग़ैर चश्में के जो देख भी न पाता है वो बेवक़ूफ़ मुझे देखना सिखाता है
मैं अपनी हिजरत का हाल लगभग बता चुका था सभी को और बस तिरे मोहल्ले के सारे लड़के हवा बनाने में लग गए थे
प्यार मुहब्बत बा'द की बातें जान कभी ये सोचा है किस ने तेरा साथ दिया था कौन नशे में ख़त्म हुआ
कुछ रिश्तों में दिल को आज़ादी नइँ होती कुछ कमरों में रौशनदान नहीं होता है
हैरान हो के देख रहे हैं मुझे अज़ाब मैं मर रहा हूँ और बहुत इत्मीनान से
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