मोहब्बत ने मुझे औक़ात दिखला दी ज़रूरी क्यूँँ है धन ये बात सिखला दी
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Aatish Indori
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Nazm
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sherKuch Alfaaz
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माना कि धागे पक्के हैं कच्चे नहीं कॉलेज के रिश्ते मगर टिकते नहीं
sherKuch Alfaaz
जब से हम ज़िंदगी को समझने लगे तब से हम ख़ुद-कुशी को समझने लगे
sherKuch Alfaaz
फंदा-वंदा छोड़ कर मैं दूजा सपना बुन रहा हूँ ख़ुद-कुशी तुझ को नहीं मैं ज़िंदगी को चुन रहा हूँ
sherKuch Alfaaz
एक बच्चे की तरह सच्चे थे जब हमारे मकान कच्चे थे
sherKuch Alfaaz
ज़माने वाले तो तय है सताएँगे तुझे सोनम मुझे अब्दुल बताएँगे
sherKuch Alfaaz
यूँँ तो कोठियाँ हैं यहाँ बहुत मुझे फिर भी लोग मिले नहीं मैं समझ गया भले देर से बड़े शहर दिल के बड़े नहीं
sherKuch Alfaaz
उस की चाहत की थाह देखूँगा सब सेे पहले निगाह देखूँगा
sherKuch Alfaaz
तिजोरी तो भरी लेकिन ठगाई भी की उस ने वफ़ा की ढेर लेकिन बेवफ़ाई भी की उस ने
sherKuch Alfaaz
थोड़े-मोड़े थोड़ी हम तो बेहद अजीब थे रस्ते तब बदले जब हम मंज़िल के क़रीब थे
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